मेरठ। शुक्र है, कोरोना वायरस की आंच यहां तक नहीं पहुंची है। हालांकि विदेशों में रह रहे मेरठियों के परिजनों का ‘चैन’ छिना हुआ है। वे कई-कई बार फोन करके अपनों का हाल जान रहे हैं। इतना ही नहीं उन पर मेरठ लौट आने का भी दबाव बना रहे हैं। हालांकि सिंगापुर, अमेरिका और नीदरलैंड आदि देशों रह रहे युवाओं का कहना है कि वे सुरक्षित हैं।सिंगापुर में मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहे कंकरखेड़ा निवासी इंजीनियर ने व्हाट्स पर वीडियो कॉलिंग केजरिए बताया कि उनके यहां 30 से ज्यादा कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज मिल चुके हैं। सरकार ने अलर्ट किया हुआ है। वह भी सावधानी बरत रहे हैं। वहीं, बेचैन परिजन फोन करके समय-समय पर हाल ले रहे हैं।
इतना ही नहीं घर लौट आने की भी सलाह दे रहे हैं।अमेरिका में रहने वाले गढ़ रोड निवासी इंजीनियर ने फोन पर बताया कि उनके यहां अभी कोरोना वायरस का प्रभाव नहीं है। हालांकि कोरोना को लेकर बातें जरूर हो रही हैं। हालांकि परिजन लगातार संपर्क कर रहे हैं। दरअसल, वे कोरोना वायरस की वजह से ज्यादा फिक्रमंद हैं। इसी तरह नीदरलैंड और जापान आदि देशों में रह रहे युवाओं के परिजन भी परेशान हैं।
26 लोगों की निगरानी बंद
चीन से आए 26 लोगों की निगरानी बंद हो चुकी है। 31 दिसंबर 2019 से एक फरवरी 2020 तक चीन से 79 लोग लौटे हैं। इनमें से 56 मेरठ और 23 दूसरे जिलों के हैं। मेरठ के 49 लोगों का नाम, पता सत्यापित कर उनसे फार्म भरवाया गया। हालांकि छह का पता नहीं चल पाया है। जबकि एक व्यक्ति शहर से बाहर है। तीन लोगों केसैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे थे। ये सभी नेगेटिव आए हैं।
बेटा जापान, यहां परिजन परेशान
मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी एक युवक जापानी तट पर क्रूज में है। वहां कोरोना वायरस से पीड़ित कई लोग हैं। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर यह युवक 25 जनवरी को गुड़गांव से गया था। जब से उसके परिजनों को यह पता चला है कि उसके साथ के कुछ लोगों में कोरोना के लक्षण मिले हैं, वे परेशान हैं। लगातार उससे फोन पर संपर्क कर रहे हैं। गाइडलाइंस के अनुसार, चीन से लौटे या कोरोना वायरस से प्रभावित मरीज के संपर्क में रहे लोगों की 14 दिन तक निगरानी की जाती है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित मान लिया जाता है। युवक बिल्कुल स्वस्थ है।